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सिर्फ जल कभी न अर्पित करे सूर्य देव को जरूर डाल ले ये एक चीज़ खुल जायेंगे धन आने के सारे रास्ते!!

सूर्योपासना आज कोई नया नहीं है बल्कि यह तो वैदिक काल से ही अनवरत चली आ रही है। सूर्य भगवान के उदय के साथ ही अंधकार नष्ट हो जाता है और सम्पूर्ण जगत में सर्वत्र प्रकाश ही प्रकाश फैल जाता है। जगत में व्याप्त अधंकार को दूर करने वाले देवता सूर्य ही है। सूर्योदय होते ही पशु, पक्षी और मनुष्य सभी अपने-अपने कार्य में लग जाते है और पुनः सूर्यास्त के साथ सब अपने अपने घरो में लौट कर आ जाते हैं। सूर्य देव ही हमें प्रत्यक्ष रूप में प्रकृति के शाश्वत और अनवरत चलने वाले नियमो से परिचय कराते है।

सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। छठ ब्रत में उगते हुए सूर्य को तथा अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यदि आपके जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह नीच के राशि तुला में है तो अशुभ फल से बचने के लिए प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। वही यदि सूर्य किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर सुबह स्थान में बैठा है तो सूर्योपासना करनी चाहिए। साथ ही जिनकी कुंडली में सूर्यदेव अशुभ ग्रहो यथा शनि, राहु-केतु,  के प्रभाव में है तो वैसे व्यक्ति को अवश्य ही प्रतिदिन नियमपूर्वक सूर्य को जल अर्पण करना चाहिए।

यही नहीं यदि कारोबार में परेशानी हो रही हो या नौकरी में सरकार की ओर से परेशानी हो रही हो तो सूर्य की उपासना का लाभ मिलता है। स्वास्थ्य लाभ के लिए भी सूर्य की उपासना करनी चाहिए। किसी भी प्रकार के चर्म रोग हो तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे शीघ्र ही लाभ होता है। सूर्य देव को जल अर्पण करने से सूर्यदेव की असीम कृपा की प्राप्ति होती है सूर्य भगवान प्रसन्न होकर आपको  दीर्घायु , उत्तम स्वास्थ्य, धन, उत्कृष्ट संतान, मित्र, मान-सम्मान, यश, सौभाग्य और विद्या प्रदान करते हैं।

सूर्य अर्घ्य देने की विधि
  1.     सूर्योदय के प्रथम किरण में अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है।
  2.     सर्वप्रथम प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व  नित्य-क्रिया से निवृत्त्य होकर स्नान करें।
  3.     उसके बाद उगते हुए सूर्य के सामने आसन लगाए।
  4.     पुनः आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें।
  5.     रक्तचंदन आदि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि तांबे के पात्र में रखे जल या हाथ की अंजुलि से तीन बार जल में ही मंत्र पढ़ते हुए जल अर्पण करना चाहिए।
  6.     जैसे ही पूर्व दिशा में  सूर्योदय दिखाई दे आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़कर इस तरह जल अर्पण करे की सूर्य तथा सूर्य की किरण जल की धार से दिखाई दें।
  7.     ध्यान रखें जल अर्पण करते समय जो जल सूर्यदेव को अर्पण कर रहें है वह जल पैरों को स्पर्श न करे।
  8.     सम्भव हो तो आप एक पात्र रख लीजिये ताकि जो जल आप अर्पण कर रहे है उसका स्पर्श आपके पैर से न हो पात्र में जमा जल को पुनः किसी पौधे में डाल दे।
  9.     यदि सूर्य भगवान दिखाई नहीं दे रहे है तो कोई बात नहीं आप प्रतीक रूप में पूर्वाभिमुख होकर किसी ऐसे स्थान पर ही जल दे जो स्थान शुद्ध और पवित्र हो।
  10.     जो रास्ता आने जाने का हो भूलकर भी वैसे स्थान पर अर्घ्य (जल अर्पण) नहीं करना चाहिए।
जल मे मिलाये यह चीज
जब भी आप सूर्य को जल अर्पित करें जब बस लाल मिर्च के 21 दाने डाल कर सूर्य को 21 दिन तक जल अर्पित करें ऐसा करने से आपको जीवन मे किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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