ये पौधा फेफड़ो में जमा कफ बाहर निकाल फेंके साथ ही दमा, खाँसी के लिए उपयोगी!!



source : ayurvedhealing.com
अडूसा को इंग्लिश में मालाबार नट कहा जाता है। यह भारत के अधिकांश भागों में एक जंगली झाड़ी के रूप में पाया जाता है और इसे बाड़ बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। अडूसा के पत्ते, फूल, जड़ों और छाल का आयुर्वेद में हजारों साल से प्रयोग होता आया है। इसमें जीवाणुरोधी, सूजन को कम करने वाले और रक्त को शुद्ध करने वाले गुण होते हैं। मालाबार नट श्वसन रोगों के लिए आयुर्वेद में इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य औषधीयों में से

दमा के रोगी यदि अनंतमूल की जड़ों और अडूसा के पत्तियों की समान मात्रा (3-3 ग्राम) लेकर दूध में उबालकर पिएं तो फ़ायदा होता है। ऐसा कम से कम एक सप्ताह तक किया जाना जरूरी है।अडूसा, हल्दी, धनिया, गिलोय, पीपल, सोंठ तथा रिगंणी के 10-20 मिलीलीटर काढे़ में एक ग्राम मिर्च का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पीने से सम्पूर्ण श्वांस रोग पूर्ण रूप से नष्ट हो जाते हैं।

कम से कम 15 पत्तियों को कुचल कर और इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर रोगी को हर चार घंटे के अंतराल से दिया जाए तो तेज खांसी के साथ अस्थमा का भी इलाज होता है।करीब 50 ग्राम पत्तियों को 200 मिली पानी में डालकर उबालने के बाद जब यह आधा बचे, तो रोगी को देना चाहिए। इससे टीबी काफी आराम मिलता है।अडूसे के 8-10 पत्तों को रोगन बाबूना में घोंटकर लेप करने से फेफड़ों की जलन में शांति होती है।
एक है। इसके उपयोग से ब्रोंकाइटिस, कफ, ठंड, दमा आदि रोगों में बहुत लाभ होता है। अडूसा सदाबहार झाड़ी होती है जिसकी ऊंचाई 2.2 – 3.5 मीटर तक होती है। इसके फुल सफ़ेद रंग के होते हैं। यह पहाड़ी क्षेत्र छोड़ कर पूरे भारत में पाया जाता है।
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