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पूरे शरीर में कहीं भी सोरायसिस का रामबाण इलाज है देसी कैक्टस – सेंहुड

सोराईसिस एक भयंकर बीमारी है, जिससे रोगी बहुत लम्बे समय तक परेशान रहता है और ये रोग अभी तक के सबसे बुरे रोगों में से एक है. इसका इलाज काफी मुश्किल होता है, यहाँ तक के आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी इसके लिए सिर्फ स्टेरॉयड क्रीम दी जाती है जो के इसका इलाज नहीं है.

आज हम इसी के इलाज के लिए आपको एक आयुर्वेद का रामबाण इलाज बताने जा रहें हैं, जो के बड़े बड़े वैद्य या बड़ी बड़ी आयुर्वेद की संस्थाओं द्वारा आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

ये घरेलु इलाज की सबसे बड़ी बात ये है के इस इलाज के लिए आपको कही दूर जाने की ज़रूरत नहीं है, चित्र में दिखाया गया देसी कैक्टस जिसको थूहर या त्रिधारा थूहर या सेंहुड भी कहा जाता है. इसको अक्सर बगीचों में बाड के रूप में लगाया जाता है, कुल मिलकर बात ये है के इसकी उपलब्धता बहुत आसान है. तो आइये जाने इसका ये प्रयोग

सर्वप्रथम आप सेंहुड का जूस निकाल लीजिये, इस जूस के बराबर शुद्ध सरसों का तेल (सिर्फ कच्ची घानी (कोल्हू) से निकला हुआ) लेकर इसको धीमी आंच पर पका लीजिये. पकने के बाद इसको ठंडा कर के किसी कांच की बोतल में डाल लीजिये. बस दवा तैयार है. इसको रात्रि को सोते समय सोराईसिस से प्रभावित जगह पर अच्छे से लगायें. और दिन में भी इसको धुलाई करने के बाद दोबारा से लगायें. अर्थात इसको कभी सूखा नहीं छोड़ना

इस रोग में रोगी को धुप से बचाव करना होता है, धुप के सीधे संपर्क में ना आये, रोगी को सप्ताह में एक दिन प्रभावित अंग को गौ मूत्र से धुलाई करवाएं और एक दिन नीम के पानी से
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