अंतिम क्रिया के बाद शव के सिर पर डंडा क्यों मारा जाता है, जानिए इसके पीछे का चौका देने वाला रहस्य

हिन्दू धर्म में ऐसी ही एक संस्कार का पालन किया जाता है कि किसी भी इंसान के अंतिम संस्कार में महिलाओ को शमशान घाट में जाने से रोकना ! लेकिन ऐसा क्यूँ है ये हमने कभी जानने की कोशिश नहीं की है ! आखिर महिलाओ को शमशान में जाने से क्यूँ रोका जाता है ?. ये सर्वविदित है कि महिलाओ का ह्रदय पुरुषो के ह्रदय की अपेक्षा कोमल माना जाता है ! इसलिए अगर कोई महिला शमशान घाट पर जाकर अंतिम संस्कार के समय रोने लगे या डर जाये तो मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिलती है !

अंतिम संस्कार की क्रिया बहुत ही जटिल होती है और महिला का ह्रदय बहुत ही कोमल होता ! अंतिम संस्कार करते समय अगर महिला डर जाए या फिर रोने लगे तो इसका प्रभाव मृतक की आत्मा पर पड़ता है ! इसलिए शव यात्रा के समय महिलाओ को घर पर ही रहने का सुझाव दिया जाता है !मान्यता है कि शमशान घाटो पर आत्माओ का आना जाना लगा रहता है और महिलाओ को सबसे ज्यादा खतरा आत्माओ से ही होता है क्यूंकि किसी इंसान की बुरी आत्मा सबसे पहले महिलाओ को ही अपना शिकार बनाती है !

महिलाओ को घर में रखने का कारण ये भी है कि शमशान घाट से जब पुरुष वापस घर को लौटें तो उनके हाथ पैर और स्नान करवाने के लिए महिला का घर में होना अति आवश्यक है !शव दाह में मृतक के बेटे को शव के सर पर डंडे से मारने के लिए कहा जाता है ! मान्यता है कि अगर कोई मृतक तंत्र मंत्र विद्या जानता हो और उसके सर पर डंडा न मारा जाए तो कोई दूसरा तांत्रिक उसकी तंत्र मंत्र की विद्या को चुरा कर उसकी आत्मा को अपने बस में कर लेता है और फिर उसकी आत्मा के द्वारा बुरे काम करवा सकता है !

हिन्दू रीतिरिवाजों में अंतिम संस्कार करने के बाद सर को मुंडवाने का भी संस्कार है ! यह सर मृतक में परिवार में पुरुषो द्वारा किया जाता है ! हिन्दू धर्म में महिलाओ के बाल काटने की संस्कृति नहीं है इसलिए महिलाओ को अंतिम संस्कार की किसी भी क्रिया में शामिल नहीं किया जाता !
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