चेचक (Chickn Pox) का इलाज है ये नुस्खे और कभी नहीं होगा चेचक अगर करेंगे ये रामबाण उपाय


चेचक रोग के लक्षण
इस रोग के हो जाने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है। बुखार 104 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है। रोगी को बेचैनी होने लगती है। उसे बहुत ज़्यादा प्यास लगती है और पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है और साथ में जुकाम भी हो जाता है। दो-तीन दिन के बाद बुखार तेज होने लगता है। शरीर पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं। दानों में पानी जैसा मवाद पैदा हो जाता है। सात दिनों में दाने पकने लगते हैं जो कि धीरे-धीरे सूख जाते हैं। दानों पर खुरण्ड (पपड़ी) सी जम जाती है। कुछ दिनों के बाद खुरण्ड तो निकल जाती है, लेकिन उसके दाग़ रह जाते हैं।

चेचक के कारण
चेचक के रोग को घरेलू भाषा में ‘माता’ या ‘शीतला’ भी कहते हैं। यह रोग अक्सर उन बच्चों को होता है, जिनके शरीर में शुरू से ही गर्मी अधिक होती है तथा उनकी उम्र दो से चार वर्ष तक की होती है। कभी-कभी यह रोग औरतों और बड़ों में भी हो जाता है। इस रोग के फैलने का कारण वायरस (जीवाणु) हैं। इस रोग के जीवाणु थूक, मलमूत्र और नाखूनों आदि में पाये जाते हैं। सूक्ष्म छोटे-छोटे जीवाणु हवा में घुल जाते हैं और श्वसन के समय ये जीवाणु शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं। इस रोग को आयुर्वेद में ‘मसूरिका’ के नाम से जाना जाता है।

चेचक रोग होने पर सावधानियाँ

चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी आदि में छोंका नहीं लगाना चाहिए।
दरवाज़े पर और रोगी के बिस्तर के चारो और नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए।
ध्यान रखें कि बच्चा शरीर पर आए छालों या फोड़े को खरोंचे नहीं, वरना ये व फैल सकते है व दर्द भी हो सकता है। बच्चे के नाखून छोटे रखें व फोड़ों को ढंके नहीं।
रोगी के चारो तरफ साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखे।
रोगी को जब भी नहलाये, उस पानी में नीम की पत्तियों को उबाले।
आयुर्वेद में चेचक में नीम से ज़्यादा किसी पर भी भरोसा नहीं किया जाता।
बच्चे को अन्य लोगों से दूर रखें।

कभी नहीं होगा चेचक.
    चेचक के दिनों में अर्थात मई जून जुलाई में नीम के पत्तों का सेवन जो लोग किसी भी प्रकार से करते हैं, उनको कभी चेचक जैसे भयंकर रोग पीड़ित नहीं करते.
    नीम के नए मुलायम पत्ते (कोंपले) सात और काली मिर्च सात, दोनों का एक महीना लगातार प्रातः खाली पेट सेवन किया जाए तो चेचक जैसा भयंकर रोग एक साल तक नहीं होगा. पंद्रह दिन प्रयोग करने से 6 महीने तक यह रोग होने की आशंका नहीं रहती.

चेचक के रामबाण घरेलु उपाय।

पीपल की 3 या 5 पत्तिया ले, पत्तियों की डंडी तोड़ दे, इन पत्तो को १ गिलास पानी में उबाले और एक चौथाई रहने पर इस को गुनगुना ही रोगी को पिलाये। ये प्रयोग 3 से 5 दिन तक हर रोज़ सुबह और शाम को करे। इस से चेचक, टाईफ़ाएड, और खसरा और आम बुखार में बेहद लाभ मिलता हैं।

एक दूसरा घरेलु नुस्खा भी प्रयोग करे ।
नीम 11 पत्ते, तुलसी की 11 पत्तियों को 3 या 4 काली मिर्च के साथ पीसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में 2 बार पिलाये।

चेचक के दाग का इलाज.
नीम की हरी पत्तियों को पीसकर लेप बना ले, रात को सोते समय दाग पर लेप करे। और सुबह पानी से धुलाई करे। दो तीन महीने में दाग दूर हो जाते हैं।
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