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अगर आपकी त्वचा पर भी बन रहे हैं ऐसे दाने, तो हो जाइये सावधान

त्वचा सम्बंधित रोग कई कारणों से होते हैं। जिनमे से कुछ बाहरी तो कुछ आतंरिक कारण होते हैं। अब आप मुंहासों का ही उदाहरण ले लीजिये। अक्सर जिन लोगों का पेट ठीक तरह से साफ़ नहीं होता है उन्हें मुंहासों की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। इसी तरह त्वचा सम्बंधित एक और आम समस्या है बांह पर लाल दाने होना।

इस समस्या के पीछे क्या वजह है और इससे कैसे बचा जा सकता है, आइये जानते हैं।

त्वचा पर इस तरह के लाल दाने बांह के ऊपरी हिस्से के साथ ही पीठ और जाँघों पर भी हो जाते हैं। आमतौर पर 50-80% किशोर और 40% युवा कभी न कभी इस स्किन डिसऑर्डर का शिकार होते हैं। इसे 'केराटोसिस पिलैरिस (Keratosis Pilaris)' के नाम से भी जाना जाता है। इन दानों पर कभी-कभी खुजली भी चलती है।

'ग्लूटेन' होता है जिम्मेदार
विशेषज्ञ इस डिसऑर्डर को जेनेटिक मानते है। साथ ही इसकी वजह 'ग्लूटेन' को भी माना जाता है। 'ग्लूटेन' गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाए जाने वाले प्रोटीन का मिश्रण होता है। यह मुख्य रूप से gliadin और glutenin नाम के दो प्रोटीन्स से मिलकर बनता है। जिसके अधिक सेवन से कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

इम्यून सिस्टम को करता है कमजोर
ग्लूटेन को यह नाम उसकी 'ग्लू' जैसी प्रॉपर्टी की वजह से दिया गया है। गुथे हुए आटे, ब्रेड्स और अन्य ऐसे खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन की वजह से ही इलास्टिसिटी की प्रॉपर्टी होती है। शरीर में पाचन क्रिया के दौरान इम्यून सिस्टम ग्लूटेन को बैक्टीरिया की तरह बाहरी घुसपैठिया समझ लेता है। इस वजह से 'ग्लूटेन इन्टॉलरेंट' लोगों में इम्यून सिस्टम ग्लूटेन पर आक्रमण करता है जिस वजह से उन्हें समस्या का सामना करना पड़ता है।

पेट संबंधी समस्याओं से होना पड़ता है दो-चार
इन लाल दानों के अलावा ग्लूटेन इनटॉलेरेंस की वजह से एग्ज़ीमा भी हो जाता है। साथ ही इससे गैस, पेट में जलन और सूजन, पेट दर्द, डायरिया, एनीमिया और कब्ज़ जैसी समस्याएं भी जन्म लेती हैं।

इन समस्याओं की जड़ भी ग्लूटेन है
ग्लूटेन इन्टॉलरेंस की वजह से थकान, चक्कर आना भी महसूस होता है। इसके अलावा मूड संबंधी समस्याएं जैसे डिप्रेशन, चिंता, माइग्रेन भी जन्म लेते हैं। इसके अलावा ग्लूटेन की वजह से ऊँगली, घुटने, कूल्हों में दर्द, हार्मोनल इम्बेलेंस जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

त्वचा को रखें नम
इस स्किन डिसऑर्डर से बचने का कोई रामबाण इलाज़ तो नहीं है। चिकित्सा विज्ञान में भी इसके लिए कोई ख़ास उपचार नहीं मिला है। लेकिन कुछ सावधानियां रखकर और घरेलू उपचार की सहायता लेकर इससे बच सकते हैं। इससे बचने के लिए अपनी त्वचा को सर्दियों के दिनों में नम रखें। साथ ही स्किन को ड्राई करने वाले साबुन के उपयोग से बेहतर है कि माइल्ड साबुन का इस्तेमाल किया जाए। आप तेल और लोशन की मसाज भी कर सकते हैं।

डाइट पर भी दें ध्यान
ध्यान रहे कि इस दौरान अपनी त्वचा को घिसें या रगड़े नहीं। वहीं 'केराटोसिस पिलैरिस' के पीछे एक वजह विटामिन A की कमी भी मानी जाती है। इसलिए बेहतर है कि इससे बचने के लिए आप अपनी डाइट में 'विटामिन A' को शामिल कर लें। इसके अलावा ग्लूटेन के ज्यादा सेवन से भी बचें।
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