यदि घर में रखा है शिवलिंग तो तुरंत करे ये काम अन्यथा आ सकता है भारी संकट

दोस्तों हम सब भगवान् शिव की शिवलिंग के रूप में पूजा करते है लेकिन अधिकतर लोग शिवलिंग की कुछ विशेष बातो से अनजान रहते है इसलिए आज हम आपको शिवलिंग के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे.

शिवलिंग भगवान शिव का ही एक रूप है जो की देवो के देव महादेव है. शिवलिंग के पूजा बहुत फायदेमंद मानी जाती है कुछ लोग इसे घर में भी स्थापित करते है लेकिन इसे घर में रखने के बहुत सारे नियम है और अगर हम इन नियमो का पालन नहीं करेंगे तो नुकसान भी अत्यधिक है.

वास्तु शास्त्र के हिसाब देखा जाए तो शिवलिंग से हर वक़्त ऊर्जा का संचार हो रहा होता है जो की बहुत ज्यादा भी हो सकती है जो साधारण मनुष्य की जरूरत से ज्यादा हो सकती है ऐसे में घर में परेशानिया आना निश्चित है. इसीलिए जब भी आप शिवलिंग रखे तो ये ध्यान रखे की शिवलिंग का आकार अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए.

घर में शिवलिंग रखते समय एक और बात सुनिश्चित करनी है की शिवलिंग के ऊपर हमेशा जलधारा बहती रहनी चाहिए अन्यथा शिवलिंग नकारात्मंक उर्जा को अपनी और आकर्षित करता है जो की घर के लिए सही नहीं है.

शिवलिंग को पूजा घर में स्थापित करने से पूर्व यह ध्यान रखे की शिवलिंग में धातु का बना एक नाग होना चाहिए. शिवलिंग सोने, चांदी या ताम्बे से निर्मित होना चाहिए. जो लोग सोने या चांदी से बना हुआ शिवलिंग नहीं खरीद सकते वो नीचे दिए गए लिंक से ताम्बे का शिवलिंग अपने घर मंगवा सकते है – खरीदने के लिए क्लिक करे

शिवलिंग के समीप सदैव गोरी व गणेश की मूर्ति होनी चाहिए. शिवलिंग कभी भी अकेले नहीं होना चाहिए. shivling पर कभी पैकेट का दूध ना चढ़ाएं. शिवलिंग की पूजा करते समय हमेशा ध्यान रहे की उन पर पासच्युराईज्ड दूध ना चढ़ाएं, शिव को चढऩे वाला दूध ठंडा और सादा होना चाहिए.

अगर आप शिवलिंग का स्थान बदलना चाहते है तो स्थान बदलते समय उसके चरणों को सपर्श करें तथा एक बर्तन में गंगाजल का पानी भरकर उसमे शिवलिंग को रखे और यदि शिवलिंग पत्थर का बना हुआ हो तो उसका गंगाजल से अभिषेक करें. घर के किसी बंद स्थान में शिवलिंग नही रखना चाहिए, इसे खुले में ही रखना चाहिए अगर मंदिरों में भी देखे तो उनका पटाव बहुत ज्यादा होता है.

शिव पुराण की एक कथा के अनुसार जालंधर नामक एक दैत्य को यह वरदान था की उसे युद्ध में तब तक कोई नहीं हरा सकता जब तक उसकी पत्नी वृंदा पतिव्रता रहेगी, उस दैत्य के अत्याचारों से इस सृष्टि को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता होने का संकल्प भंग किया व महादेव ने जलंधर का वध। इसके बाद वृंदा तुलसी में परिवर्तित हो चुकी थी व उसने अपने पत्तियों का महादेव की पूजा में प्रयोग होने पर प्रतिबंध लगा दिया। यही कारण की है कि शिवलिंग की पूजा पर कभी तुलसी के पत्तियों का प्रयोग नहीं किया जाता।

हल्दी का प्रयोग स्त्रियां अपनी सुंदरता निखारने के लिए करती है व शिवलिंग महादेव शिव का प्रतीक है अत: हल्दी का प्रयोग शिवलिंग की पूजा करते समय नहीं करनी चाहिए।

पुराणों में केतकी के फूल को शिव पर न चढ़ाने के पीछे एक कथा छिपी है इस कथा के अनुसार जब एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी माया से प्रभावित होकर अपने आपको एक -दूसरे से सर्वश्रेष्ठ बताने लगे तब महादेव उनके सामने एक तेज प्रकाश के साथ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए. ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु से कहा की आप दोनों में जो भी मेरे इस रूप के छोर को पहले पा जाएगा वह सर्वशक्तिमान होगा।

भगवान विष्णु शिव के ज्योतिर्लिंग के ऊपरी छोर की ओर गए तथा ब्रह्मा जी नीचे के छोर की ओर गए। काफी दूर चलते चलते भी जब दोनों थक गए तो भगवान विष्णु ने शिव के सामने अपनी पराजय स्वीकार ली है परन्तु ब्रह्मा जी ने अपने पराजय को छुपाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने केतकी के पुष्पों को साक्षी बनाकर शिव से कहा की उन्होंने शिव का अंतिम छोर पा लिया है। ब्रह्मा जी के इस झूठ के कारण शिव ने क्रोध में आकर उनके एक सर को काट दिया तथा केतकी के पुष्प पर भी पूजा अर्चना में प्रतिबंध लगा दिया।
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