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पति-पत्नी के रिश्ते में आए खटास तो आजमाएं इस टोटके को

परिवार में यदि पति-पत्नी के मध्य क्लेश रहता हो, अथवा अन्य पारिवारिक सदस्यों के मध्य वैचारिक मतभेद अधिक रहते हों आप समझ नहीं पा रहे हैं कि इस समस्या से आप कैसे छूटकारा पाएं। ऐसा क्या करें? कि आपका दांपत्य जीवन सुख व शांति से भर जाएं व आपसी मतभेद खत्म हो जाए। इसके लिए आपको कुंजिका स्त्रोत के मंत्र का नियमित रूप से बताई गई विधि के अनुसार जप करना चाहिए। इससे निश्चित ही आपके रिश्ते में मिठास बढऩे लगेगी। प्रतिदिन इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। जप लाल चन्दन की माला से करना चाहिए और पूजा के समय कालिका देवी या दुर्गा जी विग्रह पर लाल पुष्प अवश्य चढ़ाने चाहिये। मंत्र इस प्रकार है

धां धी धू धूर्जटे: पत्नी वां वी वू वागधीश्वरी। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शा शीं शू में शुभं कुरू।।

पति-पत्नी के साथ-साथ यदि अन्य सदस्यों के मध्य भी किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद हों या परस्पर सामंजस्य का अभाव हो, तो ऐसी स्थिति में यह प्रयोग किया जा सकता है। सुबह सूर्योदय के समय घर के मटके या बर्तन में से घर के सभी सदस्य पानी पीते हों, उसमें से एक लोटा जल लें और तत्पश्चात उस जल को अपने घर में प्रत्येक कक्ष में छत पर छिड़के। इस दौरान किसी से बात नहीं करें एव मन ही मन निम्रलिखित मन्त्र का उच्चारण करते रहें।

कोई भी इंसान अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं करता है। कोई भी नहीं चाहता कि उसका दुनिया में कोई भी दुश्मन हो। लेकिन कोई कितनी भी कोशिश कर ले उसका कोई ना कोई विरोधी जरूर रहता है। ऐसे में जब कोई आपके पीठ के पीछे आपकी बुराई करता है। सफलता के रास्ते में रोड़े अटकाता है। ऐसे में तनाव होना एक साधारण सी बात है।यह कोई नहीं चाहता कि इस दुनिया में उसका कोई दुश्मन भी हो।

यह अनुभव की बात है कि कई बार जहां इंसानी प्रयास सफल नहीं होते, वहां कोई तंत्र-मंत्र चमत्कार कर देते हैं। अपने विरोधियों अथवा शत्रुओं को शांत करने, अपने अनुकूल बनाने अथवा अपने वश में करने के लिये, नीचे दिये गए मंत्र का नियमबद्ध जप करना आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाता है। मंत्र निम्न प्रकार है-

नृसिंहाय विद्महे, वज्र नखाय धी मही तन्नो नृसिहं प्रचोदयात्

विवाह के बाद पति-पत्नी की प्रथम अभिलाषा रहती है कि उनका घर नन्हें-मुन्ने की किलकारियों से गूंजे। लेकिन कई कारणों के चलते यह संभव नहीं हो पाता। इसका एक कारण पत्नी में होने वाली कमी भी होती है। यदि पुत्रोत्पत्तिकर यंत्र की साधना विधि-विधान से की जाए तो संतान होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। काकवंध्या स्त्री के लिए यह यंत्र काफी लाभदायक है।

विधि- इस यंत्र को अष्टगंध से भोजपत्र पर लिखकर एक महीने तक षोड्शोपचार से पूजन करें। एक अन्य भोजपत्र पर प्रतिदिन यह यंत्र एक सौ आठ बार लिखें। इसके बाद पूर्णाहुति करके ब्राह्मण भोजन, हवनादि करके मुख्य यंत्र (जिसकी एक माह तक पूजा की है) को लाल रंग के कपड़े में बांध कर स्त्री की कमर में कमर में इस प्रकार बांधें कि वह गर्भाशय से स्पर्श होता रहे। प्रतिदिन लिखे जाने वाले यंत्र को पानी में या पीपल के वृक्ष पर विसर्जित कर दें।
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