दमा Asthma या सांस की बीमारी कितना भी पुरानी हो 3 दिन में सही

कहते हैं के अगर किसी को दम (अस्थमा या श्वांस रोग) हो जाए तो ये उसकी मौत के साथ ही जाता हैं। और फिर दमा का प्रकोप सर्दियों में अक्सर और भी बढ़ जाता हैं। मगर आज हम आपके लिए ले कर आये हैं एक ऐसा प्रयोग जो हमारे बहुत से भाइयो द्वारा अनुभूत हैं और अनेक लोगो का दमा इस से बिलकुल सही भी किया हैं, और अनेक वैध लोग भी इस प्रयोग को अक्सर इस्तेमाल करते हैं।

आइये जाने दमबेल (tylophora indica) के इस प्रयोग को
दम्बेल का वनास्पित्क नाम Tylophora Indica है, अंग्रेजी नाम Indian Or Country ipecacuanha है. विभिन्न भाषाओ में इसके नाम निमिन्लिखित है. दमबेल को संस्कृत में लताक्षीरी, अन्तमूल, अर्कपर्णी, हिंदी में दमबेल, दमबूटी, उड़िया में मेंडी (mendi), मुलिनी (mulini) कन्नड़ में अडू मुटाडा (aadu mutadhagida), नेपाल कोव बल्ली(nepal kove balli), गुजराती में जंगली पीकवन(jangli peekvan), अन्तमूल, तमिल में करुँगी(karungi), कोंदम(kondam), नायप्ल्लई (nayppalai), तेलुगु में गोरिपला(goripala), वेत्तिपला(vettipala), काकोपाला(kaakopaala), नेपाली में अन्त्मूल(antmula), बंगाली में अन्त्मूल, मराठी में खदरी(khadri), पिट्वेल(pitvel), मलयालम में वल्लीपला(vallipala), नेन्स्जेरा पास्त्जा(nansjera-pastsja) और अंग्रेजी में इमेटिक स्वॉलो वर्ट Emetic Swallow Wort कहते हैं

दमबेल का उपयोग करने की विधि ( Dambel ka upyog karne ki vidhi )
दमबेल (दमबूटी) का एक पत्ता ले इसको गोली की तरह बना कर इसमें एक काली मिर्च डालिये और पान की तरह चबा चबा कर सुबह खाली पेट खा लीजिये। ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पी लीजिये। कुछ देर में उल्टी हो सकती हैं, जो के एक अच्छा संकेत हैं। उलटी होगी और आपके शरीर में जमा हुआ कफ निकल जाएगा। ये स्वाभाविक प्रक्रिया हैं घबराये नहीं, जब कफ निकल जाएगा तो उलटी अपने आप बंद हो जाएगी। इस प्रकार तीन दिन सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से दमा जैसे भयंकर और कठिन रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण आराम मिल जाता हैं। अगर तीन दिन में इसका पूर्ण लाभ ना मिले तो इस प्रयोग को एक सप्ताह तक किया जा सकता हैं। इसके बाद रोगी को एक महीने तक घी, तेल व् सभी प्रकार की खट्टी व् ठंडी चीजो से परहेज करना चाहिए।
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