Jai Mata Di!

Recent Posts

बेंगलुरु के इस डॉक्टर ने किया कमाल, सिर्फ 50 रुपये में होगा गले के कैंसर का इलाज!

आजकल के व्यस्त जीवन में हम अपनी सेहत और शरीर की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे पाते और कई बार इसी कारण हमें भयंकर रोग घेर लेते हैं। कुछ रोग तो ऐसे होते हैं, जिनका इलाज असंभव बताया जाता है। कैंसर इन बीमारियों में से एक है और भारत में हजारों लोग आए दिन इस बीमारी से अपनी जान गंवा रहे हैं। लेकिन कई बार कुछ ऐसे चमत्कार भी होते हैं, जिनपर भरोसा तो नहीं होता, लेकिन उन्हें नकारा भी नहीं जा सकता। आज हम बात करने जा रहे हैं गले के कैंसर के कारणों और इसके सस्ते इलाज के बारे में। इसके अलावा हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स के बारे में जिसने गले के कैंसर का इलाज महज 50 रुपये में कर दिखाया।

बेंगलूरु के रहने वाले डॉक्टर विशाल राव ने एक ऐसे चिकित्सा उपकरण की खोज की है, जिससे गले के कैंसर से पीड़ित लोग सर्जक के बाद भी ठीक से बोल सकेंगे और इस यंत्र की कीमत है महज 50 रुपये। डॉक्टर विशाल राव बेंगलूरु के जाने माने चिकित्सक हैं  वह हेल्थ केयर ग्लोबल कैंसर सेंटर में सर्जन भी हैं जो गले और सिर के कैंसर का इलाज करते हैं।

डॉक्टर राव का कहना है कि कोलकाता का रहने वाला एक गले के कैंसर से पीड़ित मरीज कई महीनों से कुछ खाने में असमर्थ था और उसे नाक में लगे एक पाइप से खाना दिया जाता था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होेने के कारण वह इलाज भी नहीं करा पा रहा था। इलके बाद वह मरीज डॉक्टर राव के पास पहुंचा, जहां उसका इलाज शुरू किया गया। चंद मिनट के इलाज के बाद वह बोल पा रहा था और खाना भी खा रहा था।

डॉक्टर राव के मुताबिक, कोलकाता का रहने वाला यह मरीज जब उनके पास पहुंचा तो उसकी हालत काफी गंभीर थी। उन्होंने कहा, इस बीमारी के इलाज में लोगों के लाखों रुपये खर्चे जाते हैं और फिर भी इलाज का अंत नहीं होता। लेकिन डॉक्टर राव ने मगज 50 रुपये में कैंसर के इलाज करने वाला उपकरण बनाया है। इस उपकरण का नाम है वोइस प्रोस्थेसीस, जोकि सिलिकॉन का बना है। जब मरीज का पूरी कंठनली निकाली जाती है, तो ये उपकरण मरीज की बोलने में मदद करता है।

सर्जरी के दौरान या उसके बाद विंड पाइप और फूड पाइप को अलग करके थोड़ी जगह बनाई जाती है और ये यंत्र तब वहां बिठाया जाता है। डॉक्टर राव का कहना है कि फेफड़ों से आनेवाली हवा से वॉइस बॉक्स में तरंगे उत्सर्जित होती है।  प्रोस्थेसीस की मदद से फूड पाइप में कंपन पैदा होती है, जिससे बोलने में मदद मिलती है।

डॉक्टर राव ने इस उपकरण को पेटेंट करने की अर्जी दी है और माना जा रहा है कि जल्द ही ये बाडार में उपलब्ध होगा। एचसीजी के साइंटिफिक तथा एथिकल कमिटी ने भी इसे मरीजों के लिए इस्तेमाल करने के लिए स्वीकृति दे दी है। शुरुआत में इसका इस्तेमाल कुछ मरीजों पर किया जाएगा। इस समय बाजार में मौजूद वोइस प्रोस्थेसिस की कीमत काफी ऊंची हो गई है। इसे बनाने में करीब दो साल का समय लगा। इसकी कीमत बहुत ही कम रखी गई है ताकि गरीब मरीज भी इसका इस्तेमाल कर सकें।
***