सचमुच पुनर्जन्म होता है, वाकई में होता है - Yes re-Incardination is Not a Myth

पुनर्जन्म होता है या नहीं, यह अभी भी असमंजस की स्थिति जैसा ही है? लेकिन पुनर्जन्म होता है। और वाकई में होता है। यह दावा प्रो. डेनियल वेयर ने किया है। उन्होंने सपने में वो सब कुछ देखा जो वास्तविकता में मौजूद था।


उन्होंने ये सब कैसे किया इस बारे में एक पुस्तक 'द मेकर ऑफ हैवेनली ट्राउजर्स' में जिक्र किया है। इस पुस्तक के लेखक स्वयं प्रो. डेनियल वेयर ही थे। इस किताब में मौजूद साक्ष्य बताते हैं कि पुनर्जन्म होता है!

उन्होंने यह पूरी तरह से साबित किया कि, 'जो भी सपने हम देखते हैं। सपने में जो जगह, जो घटनाक्रम देखते हैं वो इस पृथ्वी पर कहीं न कहीं मौजूद जरूर होता है।

पुस्तक का अंश....

बात सन् 1905 की है यह वो समय था जब रूस में क्रांति हो रही थी। और यहीं पर प्रो. डेनियल वेयर रहते थे। वेयर प्रसिद्ध विचारक थे। उन्होंने एक बार किसी से सुना था कि चीन में तंत्र-मंत्र के जानकार बौद्ध लामा रहते हैं जो पिछले जन्म की घटनाओं को सपने में देखने की क्षमता रखते हैं।

वेयर, चीन की ओर चल दिए। वह उस तांत्रिक लामा से चीन के बौद्ध मंदिर मे मिले। उन्होंने लामा से पुनर्जन्म के रहस्य को बयां करने का अनुरोध किया। तब बौद्ध लामा ने एक नवयुवक पर प्रयोग करके दिखाया। युवक गहरी नींद में सो गया।

तब लामा ने प्रो. वेयर को बताया, 'योग निद्रा द्वारा पुनर्जन्म के बारे में बताया जाता है। योग निद्रा का उद्गम भारत में हुआ। फिर वह चीन, जापान और दुनिया के अन्य देशों में पहुंचा।'

बातचीत जब खत्म हुई तो वो नवयुवक जाग चुका था। तब लामा ने उस युवक से पूछा, 'तुमने सपने में क्या देखा?' उसने बताया, मैंने दो सपने देखे।

पहला सपना रूस का था। मैं रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में था। जहां मेरी प्रेमिका एक बड़े शीशे के सामने श्रृंगार कर रही थी। उसे दासियां क्रास ऑफ अलेक्जेण्डर हीरे की अंगूठियां पहना रही थीं। मैनें उसे मना किया अंगूठी मत पहनो। यह सब कुछ मैं रसियन भाषा में कह रहा था। मुझे प्रेमिका से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

और दूसरे सपने में, 'मैं एक रेगिस्तान में था। जहां मेरे दो बच्चे भूख से तड़प रहे थे। और मैं उनके लिए भोजन नहीं दे पाया। इसी बीच एक ऊंट ने मेरा हाथ में काट लिया। इस तरह मेरी मौत हो गई। औऱ आपने उठा दिया।'

प्रो. डेनियल वेयर लामा और उनके सपने सुनाने वाले शिष्य से मिलकर रूस लौट आए। एक दिन अचानक पीटर्सबर्ग में उनकी भेंट एक वृद्ध महिला से हुई। उन्होंने उस महिला से लामा के सामने घटित पूरी घटना का जिक्र किया।

जैसे-जैसे वेयर उस महिला को बताते गए वह महिला हैरान होती गई। वह इसीलिए कि जिस महल की बात वो नवयुवक कर रहा था। वह उस वृद्ध महिला की ही हवेली थी।

और क्रास ऑफ अलैक्जेण्डर हीरे की अंगूठी की बात भी सच थी। तब उस वृद्ध महिला ने बताया कि, सालों पहले मेरा प्रेमी रास्पुटिन उस अंगूठी को पसंद नहीं करता था। वह हमेशा उस अंगूठी को पहनने से रोकता था।

प्रो. वेयर हैरान थे। अब तक वह पुनर्जन्म के सिद्धांत को महज एक काल्पनिक मिथ मानते थे, लेकिन इस घटना की सच्चाई ने उनका नजरिया ही बदल दिया और फिर उन्होंने एक किताब लिखी। नाम है, 'द मेकर ऑफ हैवेनली ट्राउजर्स' जिसमें ऐसे ही कुछ अन्य पहलुओं के बारे में भी उन्होंने विस्तार से बताया है।
***