क्या जानते हैं आप फ़ेयरनेस क्रीम में मिले पारे का सच - Reality of Para in Fairness Cream

भारत एवं मिडिल ईस्ट के बाज़ारों में फेयरनेस क्रीम भारी मात्रा में बिकता है। महिलाएं इन उत्पादों का प्रयोग करने में पुरुषों के मुकाबले भले ही आगे हों परंतु पुरुष भी अब इन क्रीम्स का बहुतायत में प्रयोग करने लगे हैं। ये क्रीम्स आपकी स्किन को गोरा और चमकदार बना देने का दावा तो करती हैं लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स के बारे में कोई नहीं बतलाता।

इन फेयरनेस क्रीमों में हानिकारक और अति ज़हरीला पदार्थ पारा मिला हुआ होता है जो की आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही नुकसानदायक होता है। अमेरिकन केमिकल सोसायटी के अनुसार ऐसे किसी भी उत्पाद में पारे का तय मानक 1 भाग प्रति मिलियन होना चाहिए परंतु कुछ भारत में बिक रही अधिकांश गोरेपन की क्रीमों में पारे की मात्रा 2,10,000 भाग प्रति मिलियन तक होती है जोकि सामान्य से कहीं अधिक है।

महिलाएं इन क्रीमों के प्रयोग के बाद अकसर खाने के सामान को हाथ लगाती हैं या फिर शिशुओं को छूती हैं जोकि बेहद ही ख़तरनाक है। हालांकि गोरेपन के लिए पारा वाकई एक कारगर एक्टिव इंग्रीडिएंट है परंतु चूहों पर एक जानीमानी क्रीम का उपयोग करने पर पाया गया कि उनके लिए वह उनके अंगों जैसों किडनी, लीवर एवं मस्तिष्क के लिए बेहद घातक है। एक अन्य रिसर्च में पाया गया कि पारे का प्रयोग मानवों में किडनी फेल्यर के लिए भी सक्षम है।

पहले ये क्रीम आसानी से पारा डिटेक्ट ना होने के कारण बच निकलती थीं परंतु अब आधुनिक तकनीक जैसे टोटल रिफ्लेक्शन X-Ray फ्लूरेसेंस की मदद से पारे जैसे ज़हरीले पदार्थ अब पहचान में आ जाते हैं जिससे अब वैज्ञानिकों को इस तरह के उत्पादों के बारे में अधिक जानकारी मिल पा रही है।

ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि इन क्रीमों के बिना गोरापन या चमकदार स्किन नहीं पायी जा सकती है। असल में इसके लिए आवश्यक सारी चीज़ें आपके किचिन में ही मिल जाएंगी। नीम्बू, बेसन, दही, कसा हुआ आलू, शहद आदि तमाम ऐसी चीजें हैं जो पहली बार के प्रयोग से ही अपना असर दिखाना प्रारंभ कर देती हैं फिर भी पता नहीं क्यों लोग इन फेयरनेस क्रीमों के पीछे बिना उसका सच जाने भाग रहे हैं। सौन्दर्य प्रसाधनों के बारे में कहा जाता है कि आपको अपने शरीर पर सिर्फ ही पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए जिसे आप खा सकें। पारे जैसे ज़हरीले पदार्थ कभी भी इन प्राकृतिक संसाधनों का स्थान नहीं ले सकते।
***