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अचानक शरीर में नस खिंच जाना, जरुर पढ़े

आधुनिक जीवन शैली-जिसमें व्यक्ति आराम पसंद जीवन जीना चाहता है और सभी काम मशीनों के द्वारा करता है तथा खाओ पीओ और मौज करो की इच्छा रखता है जो आपके जीवन में इस प्रकार के जटिल रोगों को जन्म दे रही हैं रात को सोते समय या अचानक ही कभी-कभी नस चढ़ जाती है इसकी वजह से लगता है कि बस जान निकल जायेगी और कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा दर्द सा भी महसूस होता है तथा पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है-
नस पर नस चढ़ना के कुछ घरेलू उपचार-
  1. नस पर नस चढ़ना एक बहुत साधारण सी प्रक्रिया है- लेकिन जब भी शरीर में कहीं भी नस पर नस चढ़ना जाए तो आपकी जान ही निकाल देती है और अगर रात को सोते समय पैर की नस पर नस चढ़ना जाए तो व्यक्ति चकरघिन्नी की तरह घूम कर उठ बैठता है यदि आपके साथ हो जाये तो तुरंत ये उपाय करें-
  2. अगर आपकी नस पर नस चढ़ जाती है तो आप जिस पैर की नस चढ़ी है तो  उसी तरफ के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें ऐसा जब तक करें जब तक ठीक न हो जाए-
  3. आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें-नस उतर जाएगी-
  4. सोते समय पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं तथा जब भी आराम करें तो पैरों को ऊंचाई पर रखें-
        जिस अंग में सुन्नपन हो तो प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे ये सिकाई 15 मिनट दिन में तीन-चार बार करे-
  5. अगर गर्म-ठंडी सिकाई तीन से पांच मिनट की करें तो इस समस्या और दर्द दोनों से जल्द ही राहत मिलेगी-
  6. आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों यानी तंतुओं पर हल्का सा खिंचाव दें और आहिस्ता से मालिश करें-
  7. वेरीकोज वेन के लिए पैरों को ऊंचाई पर रखे तथा पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए-
क्या परहेज करें-
  1.     यदि आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं तो परहेज और उपचार से नियंत्रण करें तथा शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले तत्वों का सेवन नहीं करें-
  2.     सही नाप के आरामदायक, मुलायम जूते पहनें और यदि आप में अतिरिक्त वसा है तो अपना वजन घटाएं तथा रोज सैर पर जाएं या जॉगिंग करें-इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं-
  3.     फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल आदि और मैदा व पास्ता जैसे रिफाइंड फूड का सेवन बिलकुल भी न करें-
  4.     लेटते समय आप अपने पैरों को ऊंचा उठा कर रखें तथा पैरों के नीचे तकिया रख लें-इस स्थिति में सोना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहता है-
भोजन में क्या लें-
  1.     आप अपने भोजन में नीबू-पानी,नारियल-पानी,फलों का विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि अवश्य ही शामिल करें-
  2.     नियमित सब्जियों में आप पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें-
  3.     दो-तीन अखरोट की गिरी, दो-तीन पिस्ता, पांच-छ बादाम की गिरी, पांच-दस किशमिश का रोज़ सेवन करें-
कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है नस पर नस चढ़ जाती है और शरीर में कहीं भी या किसी भी मांसपेशी में दर्द हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ भी नही है-लेकिन ये पेन किलर कोई स्थाई इलाज नहीं है ये तो बस एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर आपका ब्रेन इस दर्द को एहसास नहीं करता है और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है जिसे आप चाह कर भी इनकार नहीं सकते हैं-

कारण-

    नस पर नस चढ़ना तो एक बीमारी है लेकिन कहाँ-कहाँ की नस कब चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता कुछ दर्द यहाँ लिख रहा हूँ जो इस तरह हैं-मस्कुलर स्पाजम, मसल नोट के कारण होने वाली सभी दर्दें जैसे कमरदर्द, कंधे की दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द, छाती में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, ऊँगली या अंगूठे में दर्द, पूरी टांग में दर्द, घुटने में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, घुटने के पीछे दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एडी में दर्द, पंजे में दर्द, नितंब (हिप) में दर्द, दोनो कंधो में दर्द, जबड़े में और कान के आस पास दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं-हमारे शरीर में लगभग 650 मांसपेशियां होती हैं जिनमे से 200 के करीब मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट से प्रभावित होती हैं-

    इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना-उठना या सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना,उलटे सोना,दो-दो सिरहाने रख कर सोना,बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि-

    पहले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और मशीनीकरण के ना होने के कारण शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे-जैसे वाहनों के अभाव में मीलों पैदल चलना,पेड़ों पर चढ़ना, लकड़ियां काटना, उन्हें जलाने योग बनाने के लिए उनके टुकड़े करना(फाड़ना), खेतों में काम करते हुए फावड़ा, खुरपा, दरांती आदि का इस्तेमाल करना जिनसे उनके हाथो व पैरों के नेचुरल रिफ्लेक्स पॉइंट्स अपने आप दबते रहते थे और उनका उपचार स्वयं प्रकृति करती रहती थी-इसलिए वे सदा तंदरुस्त रहते थे-आपके शरीर को स्वस्थ रखने में प्रकृति की सहायता करती थी-शरीर में किसी भी रोग के आने से पहले हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ जाती है-
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