एक्ज़िमा और सोराइसिस के लिए रामबाण उपाय।

एक्जीमा क्या हैं।

इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।

मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

आइये जाने इस रामबाण प्रयोग के बारे में।
250 ग्राम सरसों का तेल लेकर लोहे की कढ़ाही में चढ़ा कर आग पर रख दे। जब तेल खूब उबलने लगे तब इसमें ५० ग्राम नीम की कोमल कोंपल (नयी पत्तिया) डाल दे। कोपलों के काले पड़ते ही कड़ाही को तुरंत नीचे उतार ले अन्यथा तेल में आग लग कर तेल जल सकता हैं। ठंडा होने पर तेल को छान कर बोतल में भर ले। दिन में चार बार एक्ज़िमा पर लगाये, कुछ ही दिनों में एक्ज़िमा नष्ट हो जायेगा। एक वर्ष तक लगते रहेंगे तो ये रोग दोबारा नहीं होगा।

सहायक प्रयोग –
चार ग्राम चिरायता और चार ग्राम कुटकी लेकर शीशे या चीनी के बर्तन में 125 ग्राम पानी डालकर रात को उसमे भिगो दे और ऊपर से ढक कर रख दे। प्रात: काल रात को भिगोया हुआ चिरायता और कुटकी का पानी निथार कर कपडे से छान कर पी ले और पीने के बाद 3-4 घंटे तक कुछ नहीं खाए और उसी समय अगले दिन के लिए उसी पात्र में 125 ग्राम पानी डाले। इस प्रकार चार दिन तक वही चिरायता और कुटकी काम देंगे। तत्पश्चात उनको फेंककर नया चार चार ग्राम चिरायता और कुटकी डालकर भिगोये और चार चार दिन के बाद बदलते रहे। यह पानी लगातार दो चार सप्ताह पीने से एक्ज़िमा, फोड़े फुंसी आदि चर्म रोग नष्ट होते हैं, मुंहासे निकलना बंद होते हैं और रक्त साफ़ होता हैं।

विशेष –
1. एक्ज़िमा में इस कड़वे पानी को पीने के अलावा इस पानी से एक्ज़िमा वाले स्थान को धोया करे।

2. इस प्रयोग से एक्ज़िमा और रक्तदोष के अतिरिक्त हड्डी की टी बी, अपरस(सोराइसिस) और कैंसर आदि अनेक बीमारिया दूर होती हैं। इन कठिन बीमारियो में आवश्यकतानुसार एक दो महीने तक ये पानी पीना चाहिए। छोटे बच्चो को ये दो चम्मच की मात्र में पिलाना चाहिए। बच्चो को ऊपर से थोड़ा पानी पिलाया जा सकता हैं।

3. इस प्रयोग से सोराइसिस जैसा कठिन चर्म रोग दूर होता हैं। इस प्रयोग को एक दो महीने करने से सोराइसिस जैसी लाइलाज बीमारी में आशातीत लाभ होता हैं।

4. हर प्रकार के ज्वर में विशेषकर बसे हुए ज्वर में ये प्रयोग अत्यंत लाभकारी हैं।

परहेज –
खटाई खासकर इमली आमचूर की खटाई, दही, अचार, भारी, तली, तेज मिर्च मसालेदार भोजन तथा नशीले पदार्थो का सेवन ना करे। नमक का सेवन भी ना करे। और अगर थोड़ा बहुत नमक खाना हो तो सिर्फ सेंधा नमक ही खाए।
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