क्या पेशाब रोकने के इस अजीब से फायदे के बारे में जानते हैं आप

आपने पेशाब रोकने के नुकसान के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने कभी पेशाब रोककर रखने के फायदे के बारे में सुना है? जी हां, शोधकर्ता आइरिस ब्लैंडों-गितलिं के अनुसार पेशाब रोकने से इच्छा शक्ति बढ़ती है। विज्ञान के अनुसार भी ये ट्रिक काम करती है। तो चलिये जानते हैं कि ये माजरा भला है क्या-
शोध के अनुसार

पेशाब पर हुए एक शोध से पता चलता है कि पेशाब को रोककर रखना आपकी इच्छा शक्ति को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फुलरटन में साइकोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर, ‘आइरिस ब्लैंडों-गितलिं’ के अनुसार इसका संबंध इंपल्स कंट्रोल (आवेग नियंत्रण) से है। प्रोफेसर, ‘आइरिस ब्लैंडों-गितलिं’ ने ब्लैडर (मूत्राशय) के भरे होने पर दिमाग को होने वाले फायदे पर अनुसंधान किया जिसमें पता चला कि मूत्राशय के भरे होने पर न सिर्फ इच्छा शक्ति बढ़ती है बल्कि अधिक विश्वसनीय तरीके से झूठ बोला जा सकता है।

प्रोफेसर आइरिस कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि पेशाब करने से दिमाग का कोई हिस्सा सक्रिय हो जाता है, लेकिन आपको लगता है कि आप आत्म संयम को ट्रिगर कर रहे हैं, जिससे आपको अन्य प्रकार के आवेगों से लड़ने में मदद मिलती है। आवेग को कम प्रभावी करने वाला यह प्रभाव आपको बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।

पेशाब से संबंधित एक और शोध में डच शोधकर्ताओं ने पाया कि भ्रामक मानसिक परीक्षण के दौरान जिन लोगों ने पेशाब किया उनकी तुलना में, पेशाब रोककर रखने वाले लोगों नें ज्यादा स्कोर पाया। शोध में पाया गाय कि जिन लोगों ने पेशाब को रोककर रखा वे प्रश्नों पर ज्यादा बेहतर तरीके से फोकस कर पाए।

ब्लैंडों-गितलिं कहती हैं कि इस शोध में उन्होंने लोगों को तब तक पेशाब जानें तक रोका, जब तक कि उन्हें ऐसा करने की इच्छा हो रही थीं। लोगों को तब नहीं रोका गया जबकि वे पेशाब रोक ही न पा रहे हों। तो पेशाब को बहुत ज्यादा देर तक नहीं रोकना चाहिये।

हालांकि वहीं दूसरी ओर कई शोध और विशेषज्ञ ज्यादा देर तक पेशाब रोककर रखने के गंभीर नुकसानों को साबित कर चुके हैं। ऐसा करने से यूरेन ट्रेक्ट इंफेक्शन हो सकता है। क्यूंकि हमारी किडनी हर पल हमारे खून को डी टोकसीफ़ाय करके बूँद बूँद के द्वारा हमारे शरीर से गंदगी निकाल कर बाहर करने में हमारी सहायता करती है.. ऐसे में अगर हम पेशाब को रोकेंगे तो भले ही कोई मानसिक लाभ हो मगर इसके शारीरिक नुक्सान हमको झेलने ही पड़ेंगे।
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