बिना आपरेशन मोतिया बिंद की सटीक दवाँ, जरूर जाने क्योंकि बुढ़ापे में लगभग 80% लोगो इससे ग्रसित होते है

बिना ऑपरेशन मोतियाबिंद से पाये छुटकारा : बिना आपरेशन मोतिया बिंद की सटीक दवा मगर ये वैद्य या जानकार ही कर सकते हैं क्योंकि दवाँ बहुत मेहनत से बनती है। हर किसी के बस की बात नहीं और वैद्य भी बनाएँ तो हर तरह के उतार चढाओ को ध्यान मे रखते हुए ही बनायें।

चमत्कारी दवाँ बनाने का तरीका :
तूतिया हरा जो खदान का हो (सावधान : लोग घरों मे भी बनाने लगे हैं) 2 तोला को बारीक पीस लें और उसको एक घंटा आक के दूध मे घोंटे (50 ग्राम दूध लगेगा) फिर छाया मे सुखा लें और फिर दूध डाल कर एक घंटा घोंटें और छाया मे सूखने बाद फिर दूध डाल कर पूरे सौ बार इसी तरह प्रयोग करलें। मेहनत एक ही बार होगी लेकिन ये जिंदगी भर काम देगा। जैसे ही सौ पूरे होने बाद गाय के घी मे मिलादे और जरा घोट दे ताकि दूध और दवा खूब मिल जायें और मरहम जैसा बनजाये फिर जितनी ऱुई घी मे ली जो दवा मे भीग सके उतनी को तर करके बत्ती बनायें और मिट्टी के दीपक मे बत्ती रख कर एक चीनी मिट्टी या मिट्टी का कटोरा थोडा बडा सा उपर से औंधा दों जैसे तवा ऱखते है और बत्ती जला कर नीचे रखदें। सारा धुआ कटोरे मे जमा होता जायगा जब पूरी बत्ती जल जाये तो। घुआ का कालापन और जली हुई बत्ती को मिला घोटलें जब बारीक सुरमा जैसा हो जाये शीशी मे रखले बस दवा बे मिसाल तैयार है।

प्रयोग करने का तरीका :
विधि इस दवा से आधी रत्ती मोतिया बिंद के मरीज की आंखों मे लगओ और एरेंड का पत्ता आखों पर रख कर बांध दे एरेंड ना मिले तो पान का पत्ता बांधें और तीन घंटे बाद पट्टी खोलकर फिर दवा डालें और पट्टी बांध दे एक दिन मे चार बार दवा डालना है 2-3 घंटे के अंतराल के बाद। बस एक ही दिन करना है आखरी बार जब पट्टी खोले तो आंखौ को गरम पानी से धो डाले फिर धीरे दोनों आंखें खोलने को कहें नजर खुल जायेगी फिर जीवन भर ये शिकायत ना होगी।

नोट ये काम बंद मकान मे करे जहा हवा ना लगती हो रोशनी तेज़ ना हो और जब तक आखरी पट्टी ना खुल जाये आंखे ना खोलने दो और जिस दिन ये कराये पट्टी खोसने के बाद उस रात सोने ना दो अगर बेचैनी हो तो आधा घंटा सो सकते हैं। कृपया ध्यान रहे यह प्रयोग कुशल वैद्य द्वारा ही कराये अनुचित तरह से किया गया प्रयोग नुकशान दायक हो सकता है। – मुनीर शाह जी का अनुभूत प्रयोग
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