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16 साल बाद चैत्र नवरात्र पर अद्धभुत्त योग साथ ही स्थापना का श्रेष्ठ समय

इसवर्ष चैत्र नवरात्र की घट स्थापना अमावस्यायुक्त प्रतिपदा में होगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे यहां उदियात तिथि मानी जाती है, चैत्र माह और नवसंवत्सर विक्रम संवत 2074 का आरंभ 28 मार्च मंगलवार को सुबह 8:28 मिनट पर होगा जबकि 8:27 मिनट तक अमावस्या रहेगी।

सूर्य उदय के समय अमावस्या रहने से अमावस्यायुक्त प्रतिपदा में स्थापना होगी। इससे पूर्व लगभग 16 साल पहले 25 मार्च 2001 को भी अमावस्यायुक्त प्रतिपदा में घट स्थापना थी।

तब सूर्योदय 6:26 बजे के बाद 6:52 तक अमावस्या थी। पंडितों के अनुसार इस बार नवरात्र में प्रतिपदा तिथि का क्षय है। नवरात्र में देवी का आह्वान, स्थापना, पूजन सुबह के समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रतिपदा तिथि 28 मार्च को सुबह 8:28 से 29 मार्च सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि जाएगी।

क्योंकि सूर्योदय के समय प्रतिपदा नहीं होगी, इसलिए इस नवरात्र में प्रतिपदा तिथि का क्षय हो गया है।

शास्त्रों के अनुसार स्थापना और आरोपन आदि कर्म के लिए सुबह का समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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