आँख का फड़कना रोकने के कुछ उपाय

पलकों का फड़कना या आंखों का फड़कना (blepharospasms) कभी-कभी शर्मनाक, असुविधाजनक और बेकार की परेशानी का कारण बन सकता है। यदि आपने पहले कभी इसका अनुभव न किया हो तो आपको इससे डर भी लग सकता है। पलकों का फड़कना, मांस-पशियों का एक अनैच्छिक संकुचन है, जिसका मुख्य कारण तनाव होता है परंतु ये अन्य कारणों से भी हो सकता है जैसे आँखों पर पड़ता जोर, थकान, सूखी आँखें, उत्तेजक पदार्थों (काफी या दवायें) का अत्यधिक सेवन, डीहाइड्रेशन, अत्यधिक शराब पीना आदि। कारण कोई भी हो लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। पलकों या आंखों का फड़कना रोकने के लिये आपके पास बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं।

जोर-जोर से पलकें झपकाने से शुरू करें
जितना सम्भव हो उतनी जोर से आँखें बंद कर लें। फिर आँखों को खोल कर यथासम्भव फैलायें। इस क्रिया को तब तक जारी रखें जब तक आँसू न निकलने लगे। यदि दर्द का एहसास हो या आँख और जोर से फड़कने लगे तो इस क्रिया को तुरंत रोक दें।

    इस क्रिया को जल्दी-जल्दी करने से आँख में आँसुओं की एक समतल परत बन जाती है। इसके कारण आँखों मे आर्द्रता, पलकों को आराम, आँख और चेहरे के मसल्स की वर्जिश तथा आँखों मे रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे समस्या से राहत मिलती है।

मसाज से आँखों को आराम पहुंचायें
पनी बीच वाली उंगली की सहायता से निचली पलक की गोलाई में मसाज करें। जिस आँख में फड़कन हो उसकी पलक का लगभग 30 सेकेण्ड्स तक मसाज करें। किसी तरह के जलन या संक्रमण से बचने के लिये पहले अपने हाथों और चेहरे को साफ कर लें। इस विधि से अच्छे परिणाम मिलते हैं क्योंकि इससे रक्त प्रवाह बढ़ता है और साथ ही माँसपेशियों को मजबूती मिलती है।

पलकों को 30 सेकेण्ड्स तक झपकायें
इस कार्य को पर्याप्त गति से करें। कल्पना करें कि आपकी बरौनियां तितली के पंख हैं। पलकों का झपकना आपके आँखों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह आँखों के अधिकांश माँस-पेशियों को आराम पहुंचाता है और साथ ही साथ पुतलियों को चिकनाई देता है और उनकी सफाई भी करता है जिससे फड़कना बंद हो सकता है।[४] यदि दर्द का एहसास हो या आँख और जोर से फड़कने लगे तो इस क्रिया को तुरंत रोक दें।

अपने आँखों को अर्ध-खुली अवस्था में लायें
आप महसूस करेंगे कि आपकी उपर वाली पलकें लगातार विभिन्न आयामों (amplitude) में काँप रही है। अब कँपकपाँहट को रोकने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करें।

    स्पष्ट रूप से देखने के लिये आँखों को समायोजित करने से आँखों पर कम तनाव पड़ता हैं। इससे आँखों के थकान के कारण होने वाले फड़कने की क्रिया को रोकने में सहायता मिल सकती है।

आँखों का व्यायाम करें
अपने आँखों को पूरे एक मिनट तक बंद रखें। इस अवधि में आपनी आँखों को जोर से मीचें और फिर उन्हें बिना वास्तव में खोले ढीला छोड़ दें। आँखें खोलने से पहले इस क्रिया को तीन बार दुहरायें।

    यह क्रिया आँसू का बनना बढ़ाता है ताकि आँखों के भीतर चिकनाई हो सके। आँखों के व्यायाम को न केवल उनका फड़कना रोकने के लिये प्रयोग कर सकते हैं बल्कि आँख की माँस-पेशियों को मजबूती प्रदान करने के लिये भी कर सकते हैं।
***